महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले थायराइड का 10 गुना ज्यादा खतरा

महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले थायराइड का खतरा 5 से 10 गुना ज्यादा होता है। 2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 32 प्रतिशत लोग थायराइड की बीमारी से ग्रस्त हैं, जिनमें ज्यादा संख्या महिलाओं की ही है। महिलाओं में थायराइड की ज्यादा आशंका के पीछे कारण यह है कि उनका शरीर हार्मोनल बदलाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है।

गर्भवती महिलाओं में इसका खतरा और भी ज्यादा होता है, क्योंकि इस दौरान महिलाओं में हार्मोनल बदलाव अधिक होते हैं। इसका अन्य कारण यह है कि गर्भावस्था के 15 से 17 हफ्ते के अंदर पल रहा भ्रूण अपनी थायराइड ग्रन्थि बना लेता है और वह मां से आयोडीन लेने लगता है। शरीर में मौजूद ज्यादातर आयोडीन थायराइड ग्रंथि में ही होता है। यह चयापचय को नियंत्रित करता है। इस तरह से आयोडीन की कमी भी दिक्कत बढ़ा देती है।

क्या है थायराइड

गर्दन में कॉलरबोन के ऊपर तितली के आकार की एक ग्रन्थि होती है। यह ग्रन्थि हॉर्मोन्स बनाने का काम करती है, जो शरीर की कई गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। जब इस ग्रन्थि द्वारा हार्मोन बनाने का संतुलन गड़बड़ा जाता है, तब दिक्कत शुरू होती है। थायराइड दो प्रकार का होता है – 1. हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism) और 2. हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism)। हाइपरथायरॉइडिज्म उसे कहते हैं जब थायराइड ग्रन्थि शरीर की जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति में थायराइड ग्रन्थि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती। दोनों ही स्थितियों में दिक्कत बढ़ जाती है। इसके अलावा जब गर्दन की थायराइड ग्रन्थि बढ़ जाती है तब भी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। इस दौरान गले में सूजन हो जाती है। इसे गोइटर (Goiter) कहा जाता है। थायराइड के लक्षण पता चलते ही डॉक्टर को दिखाना बेहतर होता है।

ऐसे पहचानें इस बीमारी को

शारीरिक थकान और नींद

ज्यादा थकान और अधिक नींद इसकी शुरुआती पहचान है। पूरी नींद के बाद भी हमेशा महसूस होता रहता है कि नींद आ रही है। ऐसे मरीज अपने आप को ऊर्जा विहीन पाते हैं, बावजूद इसके कि उन्होंने कोई अतिरिक्त कार्य न किया हो। इस दौरान सामान्य स्थिति में भी ठंड-गर्मी या पसीने का अहसास होने लगता है।

जोड़ों में दर्द

थायराइड होने पर जोड़ों में दर्द महसूस होता रहता है। इसके अलावा शरीर में सुन्नता या झुनझुनी महसूस होती रहती है। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों की दिक्कत भी बढ़ जाती है। यह दिक्कत खास तौर से हाथों या पैरों में होती है। इसके मरीजों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जबकि दिल की धड़कन कम हो जाती है।

वजन का घटना या बढ़ना

इस बीमारी में बहुत से लोगों का वजन सामान्य खानपान के बावजूद बढ़ने लगता है। इसी तरह बहुत से लोगों का वजन घटने लगता है। ये दोनों ही स्थितियां दिनचर्या के साथ-साथ सेहत पर भी असर डालती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति दुखी या उदास महसूस करने लगता है।

कब्ज की दिक्कत

अगर कब्ज की दिक्कत लंबे समय से बनी हुई है तो इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। यह थायराइड भी हो सकता है। थायराइड में शरीर के हार्मोन के स्तर में असामान्य बदलाव होता है जो कब्ज की समस्या को गंभीर बना देता है।

रूखी त्वचा, कमजोर बाल

थायराइड में त्वचा रूखी होने लगती है। इसके अलावा सिर के बाल कमजोर होकर गिरने लगते हैं। इस बीमारी में पलकों के बालों समेत शरीर के अन्य हिस्से के बाल भी कम होते जाते हैं।

अनियमित पीरियड

थायराइड में महिलाओं को अनियमित पीरियड का सामना करना पड़ता है। कई बार यह काफी लंबे समय तक होता है। इस दौरान रक्तस्राव भी ज्यादा होता है। इसमें दर्द काफी बढ़ जाता है।

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