कान की कैंडल के सहारे सफाई क्यों है खतरनाक

कान की वैक्स (खोंट) की सफाई के लिए बहुत से चिकित्सक कैंडल थेरेपी की सलाह देते हैं। इसे इयर कैंडलिंग (Ear candling) भी कहा जाता है। इस थेरेपी के कई फायदे गिनाए जाते हैं। इसी आधार पर स्थानीय क्लिनिक में एक बार की कान सफाई के मोटे पैसे लिए जाते हैं। लेकिन दुनिया के आला चिकित्सा विज्ञानी न सिर्फ इस थेरेपी के लाभ के दावों को खारिज करते हैं, बल्कि उनका कहना है कि यह काफी खतरनाक भी हो सकती है।

बढ़ सकता है दर्द

अमेरिकन अकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी के अनुसार अभी तक इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि कैंडल के सहारे कान की सफाई कारगर है। इससे वैक्स में कोई कमी नहीं आती है। इसके विपरीत इससे वैक्स एक जगह इकट्ठा हो जाती है, जो कि कान दर्द या अन्य दिक्कत बढ़ाने का कारण बनती है। इस तथ्य को ईरानी जर्नल ऑफ ऑटोरहिनोलरिंजिओलॉजी की रिपोर्ट भी प्रमाणित करती है। इसके अनुसार अध्ययन में पाया गया कि एक 33 वर्षीय महिला के कान में दर्द इसलिए हो रहा था कि उसने कान साफ कराने के लिए इस थेरेपी का सहारा लिया था। इस थेरेपी के दौरान उसके कान में वैक्स जमा हो गई थी, जब उसे निकाला गया तब जाकर महिला को आराम मिला।

क्या है कैंडल थेरेपी

कैंडल थेरेपी में एक खास तरह की कैंडल से कान की वैक्स निकाली जाती है। करीब एक फीट ऊंचाई वाली ये रेडिमेड कैंडल मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध होती हैं। इसे कान में लगाकर इसके ऊपर के हिस्से को जला दिया जाता है। यह पिघलकर शरीर पर न गिरे, इसलिए इसके निचले छोर पर तौलिया या कोई प्लेट आदि लगा दी जाती है। कैंडल को करीब 15 मिनट तक जलने दिया जाता है। इसे जलकर खत्म होने से थोड़ा पहले बुझा दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह कैंडल कान के अंदर की वैक्स खींचकर बाहर निकाल देती है। ध्यान रखें यह क्रिया खुद से कभी न करें, इसके लिए किसी विशेषज्ञ का ही सहारा लें।

फायदे के ये हैं दावे

दावा है कि इस चिकित्सा से कान की वैक्स के अलावा इसकी वजह से होने वाली बार-बार की खुजली से भी छुटकारा मिलता है। इसके पैरोकारों के अनुसार इयर कैंडलिंग से सुनने की क्षमता बढ़ती है। इससे टिनिटस (कान में आवाज गूंजने का अनुभव होना), साइनस (आंख, नाक, गाल या माथे के आसपास सूजन और दर्द होना) और गले की खराश में आराम मिलता है। इस थेरेपी से तनाव और अवसाद कम करने में भी मदद मिलती है।

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