आपके बच्चे का ‘स्क्रीन टाइम’ प्रतिदिन कितना होना चाहिए

बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम (Screen Time) आज दुनिया की प्रमुख चिंताओं में शामिल हो चुका है। इस चिंता का प्रमुख कारण है बच्चों के विकास और शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आना। तमाम रिसर्च, विभिन्न इंस्टीट्यूट और चिकित्सा जगत से जुड़ीं कई नामी संस्थाएं इसके खतरों से आगाह कर चुकी हैं। उनके अनुसार जो लोग इन खतरों को समझकर भी अपने बच्चों को इनके प्रति सचेत नहीं कर रहे, वे उनका भविष्य बिगाड़ रहे हैं।

क्या है स्क्रीन टाइम

किसी स्क्रीन वाले डिवाइस पर बिताए जाने वाले समय को स्क्रीन टाइम कहा जाता है। मोबाइल, टैबलेट, आईपॉड, कम्प्यूटर, टीवी, वीडियो गेमिंग सेट आदि इसमें शामिल हैं। डिजिटल चलन बढ़ने के बाद आज हर घर में बच्चों का अधिकांश समय इन्हीं डिवाइस के सहारे बीत रहा है।

किस आयु के लिए कितना समय

द रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ पेडियाट्रिक्स (The Royal Australian College of Paediatrics) ने बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर उम्रवार एक नियम (Rule) तैयार किया है। यह इस प्रकार है :

  • 3 साल से पहले : कोई स्क्रीन टाइम नहीं
  • 6 साल से पहले : इंटरनेट का प्रयोग नहीं
  • 9 साल से पहले : वीडियो गेम नहीं
  • 12 साल से पहले : सोशल मीडिया का कोई प्रयोग नहीं

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार 18 से 24 महीने तक के बच्चों को वीडियो चैटिंग को छोड़कर अन्य किसी भी तरह के मीडिया के प्रयोग से दूर रखना चाहिए। एकेडमी का सुझाव है कि 2 से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए रोज का स्क्रीन टाइम एक घन्टे से अधिक नहीं होना चाहिए, वो भी स्क्रीन पर दिखने वाला प्रोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला होना चाहिए।

अधिक प्रयोग, ज्यादा नुकसान

अधिक स्क्रीन टाइम बच्चों पर कई तरह से असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सबसे पहला असर बच्चों की आंखों रोशनी पर पड़ रहा है। स्क्रीन को नजदीक और एकटक देखने से आंखें ड्राई होने लगती हैं। लंबे समय में इससे रोशनी कम होने लगती है। इसके अलावा छोटे बच्चों में स्पीच डिसऑर्डर या उनके देर से बोलने की समस्या सामने आ रही है। कई भड़काऊ गेम या वीडियो के चलते बच्चों का व्यवहार और सोच बदल रही है। इससे बच्चे चिड़चिड़े और हिंसक हो रहे हैं। स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की बाहरी गतिविधियां कम हो रही हैं और वो अकेले रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बाहरी गतिविधियां जैसे-खेल आदि कम होने से उनका शारीरिक विकास भी अपेक्षाकृत कम हो रहा है।

ऐसे बदलें बच्चे की आदत

  • घर में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के प्रयोग के लिए एक सीमित टाइम सेट करें। इस पर बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी अमल करना चाहिए।
  • बच्चों की बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा दें। पढ़ाई के अलावा खेल और अन्य सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी दिन-प्रतिदिन दिखनी चाहिए।
  • प्रयास करें कि हफ्ते में कम से कम एक दिन शाम को बच्चे के साथ किसी गतिविधि में भाग लें। यह गतिविधि खेलकूद, मनोरंजन आदि किसी से भी जुड़ी हो सकती है।
  • मोबाइल, टैबलेट, आईपॉड या टीवी का प्रयोग किसी भी सूरत में देर रात में बेडरूम में न होने दें। बच्चों के मोबाइल फोन देर रात में अपने कमरे में ही रखें।
  • अधिक मोबाइल या वीडियो गेम के प्रयोग से नुकसान की खबरों के बारे में बच्चों को जागरूक करते रहें। बच्चों को डिवाइस के प्रयोग में आत्म नियंत्रण के लिए प्रेरित करते रहें।
  • बीच-बीच में जब भी समय मिले, बच्चों को टेक-फ्री यानि डिवाइस रहित लांग ड्राइव पर ले जाएं। समय बिताने के लिए अगर साथ में कुछ ले जाना चाहें तो किताबें आदि लेकर जाएं।
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