मुकद्दस माह रमजान में रोजेदार इन बातों का जरूर रखें ध्यान

रमजान की 27वीं रात शब-ए-कद्र को कुरान का नुजूल (अवतरण) हुआ था, इसलिए इसे मुकद्दस माह के तौर पर मनाया जाता है। इसे नेकियों और इबादत का महीना कहा जाता है। इस माह में दुआएं कुबूल होती हैं और पिछले सारे गुनाहों से बख़्शीश मिलती है। रोजे के दौरान अहले-सुबह से शाम तक न सिर्फ उपवास रखा जाता है बल्कि कुछ भी खाने के बारे में सोचने तक की मनाही है। इन सब बातों के बीच रोजेदारों को कुछ खास एहतियात जरूर बरतनी चाहिए। इससे न सिर्फ वो अपने को फिट रखते हैं, बल्कि इबादत के लिए उनको एक नई ऊर्जा मिलती है।

ऊर्जायुक्त आहार

रमजान के दौरान ऐसे खाद्य पदार्थों को चुनना चाहिए जो ऊर्जा से भरपूर हों। इससे जल्द भूख नहीं लगती। इसके लिए ब्राउन राइस, गेहूं की रोटी, मसूर और जई आदि का सहारा लिया जा सकता है। सेब और संतरे के सेवन से भी काफी ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा रोजेदारों को फाइबरयुक्त आहार भी जरूर लेना चाहिए, इससे पाचन तंत्र सही रहता है। ब्रोकोली, बीन्स और आलू में फाइबर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। खजूर और खुबानी भी रोजा के दौरान सर्वश्रेष्ठ आहार हैं।

शांत माहौल और प्रकृति के बीच इफ्तार से दिव्यता का अहसास होता है।

खाना कम, पानी ज्यादा

सहरी या इफ्तार के समय रोजेदारों को हल्का आहार लेना चाहिए। इसकी जगह ज्यादा तरल पदार्थ खासकर पानी लेना चाहिए। इससे भीषण गर्मी में भी शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। हल्का आहार लेने से पाचन तंत्र ठीक रहता है। इसके विपरीत स्पाइसी और तैलीय आहार लेने से पाचन तंत्र खराब हो जाता है। इससे इबादत में खलल पड़ती है। रमजान के दौरान ज्यादा मीठा खाने से भी बचना चाहिए।

एक्सरसाइज जरूरी

रमजान के पाक महीने में अपने को फिट रखने के लिए रोजेदारों को कम से कम 30 मिनट तक रोज एक्सरसाइज करनी चाहिए। इससे नई ऊर्जा मिलने के साथ-साथ मांसपेशियों का खिंचाव दूर होता है। एक्सरसाइज से रोजेदार के अंदर खुशी का भाव आता है। इसके लिए सहरी से पहले समय निकालना ठीक रहता है, क्योंकि इसके बाद पूरे दिन समय नहीं मिल पाता है।

शुगर लेवल जांचें

उपवास से शरीर को काफी फायदा मिलता है, क्योंकि इस दौरान पाचनतंत्र एकदम दुरुस्त रहता है, लेकिन डाइबिटीज के मरीजों को इस दौरान खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ब्लड शुगर लेवल बढ़ने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे शरीर का वजन घटने का भी खतरा रहता है। अगर शुगर लेवल कम हो जाए तो चक्कर आने के साथ ही सिरदर्द की दिक्कत बढ़ जाती है। इसलिए ऐसे मरीजों को शुगर लेवल की नियमित जांच करनी चाहिए।

नशे से तौबा

रमजान के दौरान धूम्रपान और शराब के सेवन से दूर रहना चाहिए। ऐसा करने वालों को इबादत का फल तो नहीं ही मिलता, उनकी सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। धूम्रपान से शरीर में थकान आती है। इसके अलावा हृदय संबंधी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। शराब के सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ ही नींद पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। इन सबके अलावा रोजे के दौरान किसी भी तरह की लालच, बुरे कार्य और झूठ से दूर रहना चाहिए।

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