कमर दर्द और साइटिका से राहत के लिए सर्वोत्तम योग है शलभ आसन

शलभ का मतलब टिड्डी (Locust) होता है। इस आसन की अंतिम मुद्रा में शरीर टिड्डी की तरह दिखता है, इसलिए इसे शलभ आसन या शलभासन (Shalabh Aasan) कहते हैं। पीठ-कमर दर्द और साइटिका के मरीजों को यह आसन जरूर करना चाहिए। इसको करने से दर्द से काफी राहत मिलती है। इससे मांसपेशियां और आंतों को मजबूती मिलती है और पाचन में सुधार होता है। इस योगाभ्यास से पेट की कई बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं। इस आसन को नियमित करने से पेट के आसपास और जांघों पर जमा फैट कम होने के साथ ही वजन कम होता है। इसके अलावा इससे शरीर में लचीलापन बरकरार रहता है। शलभ आसन से गर्दन और कंधों की नसों को आराम मिलता है और थकान दूर होती है। इससे मानसिक तनाव भी कम होता है।

Photo Courtesy : N. Modi

ऐसे करें यह योग आसन (Yoga Aasan)

  • सबसे पहले मकरासन की मुद्रा में आते हुए पेट के बल समतल जमीन पर लेट जाएं। इस दौरान अपने पैरों को दूर रखें और माथे को हथेलियों पर रखें।
  • कुछ सेकेंड बाद अब अपने दोनों पैरों को सटा लें। अब सामने देखते हुए अपनी ठोड़ी को जमीन टिकाएं और दोनों हाथों को पीछे की तरफ जमीन पर टिका दें। इस दौरान आपकी दोनों हथेलियां आसमान की तरफ होनी चाहिए।
  • अब गहरी सांस खींचें और घुटनों को बिना मोड़े दोनों पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं। पैरों को उठाने में कूल्हों का सहारा लिया जा सकता है। अब सांस लें और छोड़ें। इस मुद्रा में आपको 10 से 20 सेकेंड तक रहना है।
  • फिर सांस छोड़ते हुए पैरों को जमीन पर ले आएं और फिर से मकरासन की मुद्रा में आ जाएं। इस क्रिया को बारी-बारी से एक-एक पैर उठाते हुए भी किया जा सकता है। रोज सुबह-शाम मकरासन करने से काफी फायदा पहुंचता है।

ये लोग बरतें सावधानी

योग विशेषज्ञों के अनुसार हृदय और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को शलभासन नहीं करना चाहिए। उन्हें इससे नुकसान हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, हर्निया और पेप्टिक अल्सर के शिकार लोगों के लिए यह योगाभ्यास उचित नहीं है। अगर कमर या पीठ में बहुत ज्यादा दर्द है तब भी इस योगाभ्यास के बजाय डॉक्टर को दिखाना उचित होता है।

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