केसर की खेती है मुनाफे का सौदा, 25 लाख रुपये तक हो सकती है कमाई

केसर यानी जाफरान (Kesar) खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, उससे भी कहीं अधिक इससे कमाई की जा सकती है। इसे लाल सोना भी कहा जाता है। इसकी फसल बहुत ही कम समय यानी 3 महीने में तैयार हो जाती है। एक हेक्टेयर में खेती कर इससे 25 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं। केसर की मांग देसी से लेकर विदेशी बाजार में बहुत अधिक है, इसलिए इसकी बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती है। इसकी खेती जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि प्रदेशों में की जाती है।

मिट्टी और बुवाई का समय

केसर की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। शीतोष्ण और सूखी जलवायु इसके लिए उत्तम होती है। समुद्र तल से 2000 मीटर ऊंचे क्षेत्र पर इसकी खेती ज्यादा अच्छे तरीके से होती है। इसकी बुवाई जुलाई के मध्य में करनी चाहिए। अक्टूबर में इसके फूल तैयार हो जाते हैं। इन्हीं फूलों से केसर तैयार होते हैं।

ऐसे करें बुवाई

केसर का पौधा जामुनी रंग का एक फूल के रूप में होता है। इसकी कई प्रजातियां होती हैं, जिनमें कश्मीरी और अमेरिकन केसर मुख्य हैं। केसर की बुवाई के समय इसके कंद को 7 सेंटीमीटर की गहराई में लगाना चाहिए। 10×10 सेंटीमीटर की दूरी इसके लिए उचित मानी जाती है। इसके पौधे को प्रतिदिन 6-7 घंटे धूप की आवश्यकता होती है। हर एक दिन छोड़कर इसे हल्का पानी देना चाहिए। इसमें गोबर की खाद डालनी उपयुक्त होती है। घास आदि से बचाने के लिए इसकी निराई भी बहुत जरूरी है।

खेती पर खर्च

केसर की खेती में ज्यादा खर्च इसके बीज पर आता है। दो तरह से इसकी बिजाई होती है-एक इसके बल्ब (कंद) की जमीन में बुवाई कर, दूसरे इसके बीज से भी इसे उगाया जा सकता है। ये बीज सरसों के बराबर होते हैं। आधा एकड़ में इसकी खेती पर 1.5 लाख से से लेकर 2.5 लाख तक खर्च आता है। छोटे स्तर पर कम खर्च से भी इसकी खेती की शुरुआत की जा सकती है।

केसर का उत्पादन

केसर के करीब डेढ़ लाख फूलों से 1 किलोग्राम केसर निकलता है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में खेती से करीब 4.5 से 5 किलोग्राम केसर की उपज होती है। ये केसर फूलों को सुखाकर निकाले जाते हैं। 1 किलोग्राम केसर का रेट देसी मार्केट में 2.5 से 3 लाख तो विदेशी मार्केट में 5 लाख रुपये तक है।

मार्केटिंग और बाजार

केसर का उपयोग दूध और उससे बने उत्पादों में प्रयोग किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ कई बीमारियों में भी उपयोगी है, इसलिए बाजार में इसकी मांग बहुत अधिक है। आसपास के बड़े किराना दुकानदारों से संपर्क कर केसर की उपज आराम से बेची जा सकती है। बड़े पैमाने पर इसके व्यवसाय के लिए अपने केसर के ब्रांड का प्रचार करना चाहिए। इसके अलावा इसकी ऑनलाइन बुकिंग के लिए वेबसाइट तैयार करानी चाहिए। एक बार बुकिंग शुरू होने के बाद हमेशा के लिए फायदे के रास्ते खुल जाते हैं।

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