लोटस टेम्पल (Lotus Temple) : कब, क्यों और कैसे घूमने जाएं

स्थित : नेहरू प्लेस (कालकाजी मंदिर के पास)।

खुलने का समय : सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक (अक्टूबर से मार्च तक)। सुबह 9:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक (अप्रैल से सितंबर तक)।

खुलने के दिन : मंगलवार से शुक्रवार तक।

बंदी का दिन : सोमवार।

नजदीकी मेट्रो स्टेशन : कालकाजी मंदिर मेट्रो स्टेशन (करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर)।

प्रवेश शुल्क : निशुल्क।

फोटोग्राफी : अनुमति आवश्यक। (मोबाइल ले जा सकते हैं)।

दिल्ली का लोटस टेम्पल (Lotus Temple) एक ऐसा पवित्र स्थल है, जहां असीम शांति की अनुभूति होती है। इसे कमल मंदिर भी कहा जाता है। दुनिया के सात प्रमुख बहाई उपासना घरों में से यह एक है। इसके अंदर कोई मूर्ति स्थापित नहीं है। यहां विभिन्न धर्मों से संबंधित पवित्र लेख पढ़े जाते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों से मौन होकर ध्यान लगाने की अपील की जाती है। हिंदू, इस्लाम, बौद्ध और जैन धर्म में कमल की स्वीकार्यता को देखते हुए इस मंदिर को कमल का आकार दिया गया। यह सफेद संगमरमर से बना है। ईरान के प्रसिद्ध वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने इसका डिजाइन तैयार किया था। लोटस टेम्पल 1986 में बनकर तैयार हो गया था, पर लोगों के लिए यह पूरी तरह 1987 से खुला।

यह है खासियत

लोटस टेम्पल परिसर 26 एकड़ में स्थित है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के एक बहाई अनुयायी ने अपनी पूरी संपत्ति इस मंदिर की जमीन खरीदने के लिए दान कर दी थी। इस मंदिर के डिजाइन में कमल की 27 पंखुड़ियां बनाई गई हैं। इसमें करीब 40 मीटर ऊंचाई वाले 9 बड़े प्रवेश द्वार हैं जो मंदिर के मुख्य हॉल में खुलते हैं। इस मंदिर में 1,300 से 2,500 लोग एक साथ बैठ सकते हैं, इसीलिए इसे अपने तरह का एशिया का सबसे बड़ा मंदिर कहा जाता है। लोटस टेम्पल की हरियाली और साफ-सफाई यहां सैलानियों को खूब आकर्षित करती है। यहां तरह-तरह के पेड़-पौधे और करीने से उनकी छंटाई हर किसी का मन को मोह लेती है। यहां हर वर्ष देश-विदेश से लगभग 45 लाख पर्यटक घूमने आते हैं। यहां घूमने के लिए 2-3 घन्टे काफी है।

नजदीक में कहां घूमें

लोटस टेम्पल पहुंचने के बाद नजदीक स्थित कालकाजी देवी मंदिर और इस्कॉन मंदिर भी आसानी से घूमा जा सकता है। कालकाजी देवी मंदिर की यहां से दूरी करीब 600 मीटर है। इस्कॉन मंदिर यहां से 2.4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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