महरौली के पुरातात्विक पार्क में एक हजार साल का इतिहास जानें

दिल्ली के शोरगुल से दूर किसी प्राकृतिक और शांत वातावरण में समय गुजारते हुए इतिहास से रूबरू होना चाहते हैं तो महरौली का पुरातात्विक पार्क (Mehrauli Archaeological Park) इसके लिए सबसे उचित स्थान है। यह दिल्ली के 20 पर्यटन स्थलों में से एक है। विश्व विरासत स्थल कुतुबमीनार से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह पार्क 200 एकड़ में फैला हुआ है। यहां 100 से अधिक ऐतिहासिक स्मारक किसी न किसी रूप में देखे जा सकते हैं।

पार्क के अंदर क्या-क्या

यह पुरातात्विक पार्क करीब 1,000 वर्षों का इतिहास समेटे हुए है। यहां लाल कोट के खंडहर देखे जा सकते हैं। लाल कोट को 1060 ईस्वी में तोमर राजपूतों ने बनवाया था। यहां बलबन और बलबन के बेटे शाहिद खान का मकबरा, राजों और गंधक की बावली, बगीची की मस्जिद, कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की दरगाह और अधम खान का मकबरा भी स्थित है। इसके अलावा पार्क के अंदर कुली खान का मकबरा भी देखने और जानने लायक है। इस मकबरे को बाद में थॉमस थियोफिलस मैटकॉफ ने अपना सप्ताहांत मनाने के स्थान के रूप में बदल दिया था। इसे दिलकुशां भी कहा जाता है। इस तरह से इस पार्क में खिलजी वंश, तुगलक वंश, लोधी वंश, मुगल वंश और ब्रिटिश काल की पूरी झलक मिलती है। इसके अंदर स्थित रोज गार्डन भी देखने लायक है।

ये बरतें सावधानी

पुरातात्विक पार्क के अंदर का हिस्सा जंगल की तरह है, इसलिए शूज या स्पोर्ट्स शूज पहनकर जाना ठीक रहता है। इसके अंदर घूमने में करीब 2 घन्टे लग जाते हैं। यहां जब भी जाएं, दिन में जाएं। शाम को रोशनी कम होती है। दिन में फोटो या सेल्फी भी अच्छी आती है। यहां से फोटो में कुतुबमीनार की झलक भी ली जा सकती है, क्योंकि वह पीछे ही दिखती है। बच्चों के साथ पुरातात्विक स्थलों से गुजरते समय सावधानी बरतें, क्योंकि नीचे गिरने का खतरा रहता है।

यहां ऐसे पहुंचें

महरौली पुरातात्विक पार्क पहुंचने के लिए कुतुबमीनार मेट्रो स्टेशन से उतरकर जाना बेहतर होता है। यहां से 10-20 रुपये में शेयरिंग ऑटो भी मिलते हैं। आप अपने साधन से भी जा सकते हैं। यहां जाएं तो पास में स्थित कुतुबमीनार और साकेत स्थित सिटी वॉक मॉल भी घूमकर आएं। 2 घन्टे में इन दोनों जगहों पर घूमा जा सकता है।

घूमने का समय : सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

खुले रहने का दिन : सप्ताह का हर दिन।

प्रवेश शुल्क : निशुल्क।

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