काजीरंगा : प्रकृति की अनुपम छटा और गैंडों-बाघों के बीच सफारी का लुत्फ उठाएं

लोकेशन : काजीरंगा नेशनल पार्क, असम

खुले रहने का दिन : 1 नवंबर से 30 अप्रैल (हर दिन)

घूमने जाने का सही समय : नवंबर से अप्रैल

प्रकृति के करीब जाने का मतलब है-शांति और असीम आनंद की प्राप्ति। असम स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) आकर भी कुछ ऐसा ही महसूस होता है। ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे और गुवाहाटी से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित काजीरंगा पार्क में जीव और वनस्पतियों की अधिकाधिक उपलब्धता दर्शकों का मन मोह लेती है। एक सींग वाले गैंडे यहां के खास आकर्षण हैं। इसके अलावा यहां बाघ, तेंदुए, हाथी, हिरण, भालू समेत जानवरों की 40 तरह की प्रजातियों को देखा जा सकता है। अकेले 106 से अधिक तो यहां शेर हैं। चिड़ियों की यहां 500 प्रजातियां पाई जाती हैं। दूसरे देशों से हर साल हजारों प्रवासी पक्षी नेशनल पार्क पहुंचते हैं, जिन्हें देखना एक अलग अनुभव होता है।

काजीरंगा के बारे में, यहां क्या घूमें

काजीरंगा नेशनल पार्क को यूनेस्को 1985 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर चुका है। यह लंबाई में पूर्व से पश्चिम 40 किलोमीटर (25 मील) और चौड़ाई में 13 किलोमीटर (8 मील) में फैला हुआ है। घूमने (Tour) के हिसाब से इसे मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है-पूर्वी रेंज, पश्चिमी रेंज और मध्य रेंज। यहां आप जीप सफारी, हाथी सफारी और बोट राइड का आनंद उठा सकते हैं। इसके लिए पहले से बुकिंग की जरूरत पड़ती है। यहां घूमने के दौरान फोटोग्राफी बहुत खास होती है। इसके लिए स्थानीय फोटोग्राफरों की सेवा भी ली जा सकती है। पार्क के भीतर और बाहर स्थित दुकानों से हस्तशिल्प, स्थानीय कलाकृतियां और कपड़े आदि खरीदे जा सकते हैं।

इस तरह हुई शुरुआत

रिकॉर्ड के अनुसार भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन की पत्नी ने 1904 में एक सींग वाले गैंडों को देखने की इच्छा से असम का दौरा किया। इस दौरान उन्हें ऐसे गैंडे दिखाई नहीं दिए। तब उन्होंने अपने पति से पार्क बनवाने को कहा, जहां इस तरह के जानवर आसानी से देखे जा सकें। इसी कड़ी में 1905 में काजीरंगा नेशनल पार्क का जन्म हुआ।

ऐसे पड़ा नाम

काजीरंगा क्षेत्र में लाल बकरियां बहुत पाई जाती हैं। कर्बी भाषा में काजी (Kazi) का मतलब बकरी और रंगाई (Rangai) का मतलब लाल होता है। कहा जाता है कि इसी के चलते इस क्षेत्र का नाम काजीरंगा नेशनल पार्क रखा गया। इसके अलावा इस पार्क के नाम के पीछे काजी नाम के लड़के और रंगा नामक लड़की की प्रेम कहानी का भी जिक्र किया जाता है। गांववालों की ओर से इनके प्रेम को मान्यता न देने पर दोनों जंगल में चले गए और इसके बाद इनका कोई पता नहीं चल पाया था। इसके अलावा पार्क के नाम को लेकर और भी कई स्थानीय किवदंतियां मशहूर हैं।

काजीरंगा कैसे पहुंचें

काजीरंगा नेशनल पार्क गुवाहाटी से करीब 220 किलोमीटर, फुर्केटिंग से 75 किलोमीटर और जोरहाट से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार और बुकिंग ऑफिस कोहोरा में स्थित है। गुवाहाटी एयरपोर्ट पर उतरकर टैक्सी से करीब 5 घन्टे में काजीरंगा पहुंचा जा सकता है। गुवाहाटी में पलथन बाजार से शेयरिंग बसें और अन्य साधन काजीरंगा के लिए मिल जाते हैं।

सफारी की बुकिंग कहां से और कब करें

जीप सफारी 2 से 3 घन्टे के लिए होती है। इसकी बुकिंग मौके पर ही सुबह 7:30 से 11 बजे और बाद दोपहर 2:00 से 4:30 बजे तक के लिए होती है। जीप आपस में शेयरिंग कर भी बुक की जा सकती है। मध्य और पश्चिम रेंज में हाथी सफारी उपलब्ध होती है। यह सेवा सुबह 5:30 से 7:30 बजे के बीच एक घन्टे के लिए मुहैया कराई जाती है। हाथी सफारी प्रति व्यक्ति 900 रुपये में उपलब्ध है। जीप सफारी का शुल्क 1,750 से 2,750 रुपये निर्धारित है। यह शुल्क अलग-अलग रेंज और दूरी पर निर्भर करता है।

ठहरने और खाने के प्रबंधन

काजीरंगा घूमने के लिए कोहोरा में रुकना ज्यादा उचित रहता है। यहां से सभी प्रमुख स्थल समान दूरी पर स्थित हैं। यहां टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के अलावा पार्क के प्रवेश द्वार के आगे स्थित होटल रिसॉर्ट में रुक जा सकता है। वाइल्ड ग्रास लॉज, डिफलू रिवर लॉज जुपुरि घर आदि रुकने के लिए प्रमुख स्थल हैं। यहां लोकल व्यंजनों का लुत्फ उठाया जा सकता है।

अन्य आकर्षण

टूर के दौरान माजुली के रिवर आइलैंड और असम के चाय बागानों का भी दौरा किया जा सकता है। इसके लिए होटल या रिसॉर्ट वालों की तरफ से भी पैकेज उपलब्ध कराए जाते हैं।

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