आपका बैक-पेन कहीं साइटिका तो नहीं

बैक-पेन (Back-pain) किसी भी तरह का हो, दुखदायी होता है। इसमें चलना-फिरना और उठना-बैठना तक मुश्किल हो जाता है। साइटिका (Sciatica) में दर्द आम तौर पर 4 से 8 हफ्तों तक के लिए ही होता है लेकिन बहुत असहनीय होता है। यह दर्द नितंब तंत्रिका (Sciatic nerve) के साथ-साथ चलता है और पीठ के निचले हिस्से से शुरू होकर, नितंब और पैरों के निचले हिस्से तक में महसूस होता है। इसमें झुनझुनी के अलावा पैर आदि सुन्न होने का अहसास भी होता है। साइटिका में दर्द शरीर के निचले हिस्से में किसी एक तरफ होता है। किसी-किसी को यह दर्द कुछ समय तक ठहर कर बार-बार होता है। इस दर्द से निजात पाने के कई घरेलू उपाय जरूर हैं, लेकिन असहनीय और बहुत लंबे समय तक दर्द रहने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

स्लिप डिस्क है मुख्य कारण

साइटिका का मुख्य कारण स्लिप डिस्क है। हमारे रीढ़ में 33 हड्डियां होती हैं, जिन्हें वर्टब्रै भी कहते हैं। ये वर्टब्रै आपस में डिस्क के साथ जुड़ी होती हैं। इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी लचीली बनी रहती है। डिस्क का बाहरी भाग तो कठोर होता है, पर इसके अंदर नरम और जेल (Gel) जैसी बनावट होती है। डिस्क को नुकसान पहुंचने की स्थिति में इसके अंदर का भाग बाहर आने लगता है। इसे स्लिप डिस्क कहते हैं। स्लिप डिस्क जब तंत्रिका को छूती या दबाती है तो क्षतिग्रस्त डिस्क के आसपास दर्द महसूस होता है। ज्यादा उम्र के लोगों की डिस्क में लचीलापन कम रह जाता है, इसलिए ऐसे लोगों को साइटिका की आशंका बनी रहती है।

इन वजहों से भी दिक्कत

शरीर का ज्यादा वजन, लंबे समय तक गलत तरीके से बैठने, ज्यादा वजन उठाने और धूम्रपान की आदत भी साइटिका का कारण बनती है। दुर्घटना में गिरकर घायल बहुत से लोग भी साइटिका का शिकार बन जाते हैं। कई महिलाओं में गर्भावस्था या प्रसूति के बाद यह दिक्कत अपने आप शुरू हो जाता है।

नितंब तंत्रिका

30 से 60 वर्ष के बीच ज्यादा खतरा

हर 10 में 4 लोगों को जीवन में कभी न कभी साइटिका का सामना करना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा 30 से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों को होता है। कम सक्रिय और दफ्तर में बैठकर काम करने वाले लोगों को साइटिका होने की आशंका ज्यादा होती है।

ऐसे पाएं राहत

  • साइटिका के दर्द से राहत के लिए हीट और कोल्ड थेरेपी का सहारा लेना चाहिए। दर्द वाले स्थान पर कपड़े में बर्फ लपेट कर रखने से काफी आराम मिलता है। ऐसा करीब 20 मिनट तक करना चाहिए। हीट-पैड से सिंकाई से भी काफी राहत मिलती है।
  • चिकिसकों के अनुसार साइटिका में स्ट्रेचिंग से नितंब तंत्रिका और शरीर के निचले हिस्से में लचीलापन बढ़ता है। इससे दर्द कम होता है। यह जरूर ध्यान रखें कि स्ट्रेचिंग के समय ज्यादे मूवमेंट से भी दिक्कत बढ़ सकती है।
  • बैक-पेन, खास तौर से साइटिका में योग को काफी प्रभावी माना जाता है। शलभासन से दर्द से काफी राहत मिलती है। इसे 5 आसान चरणों में घर में भी किया जा सकता है। इस आसन से शरीर का वजन कम होता है और पाचन तंत्र भी सुधरता है।
  • अपने बैठने-उठने की आदत सुधार कर भी दर्द से निजात पाई जा सकती है। कार या कुर्सी पर बैठें तो हमेशा अपने बैक-सपोर्ट का ध्यान रखें। सोते या बैठते समय तकिया और कुशन दर्द वाली जगह को सपोर्ट करने वाले ही लगाएं। किसी भी स्थिति में ज्यादा भार उठाने से बचें।
  • साइटिका में विटामिन बी12 और मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन बेहतर होता है। इससे पेट की जलन होती है और दर्द से राहत मिलती है। इसमें पनीर, मछली, सी-फूड और ब्राउन राइस खाना काफी लाभकारी होता है।
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