डाइबिटीज से निजात चाहिए तो मंडूकासन जरूर करें

डाइबिटीज के मरीजों के लिए मंडूकासन (Mandukasana) रामवाण के समान है। इस आसन का नियमित अभ्यास अग्नाशय (Pancreas) को सक्रिय कर देता है। इससे शरीर के अंदर इंसुलिन ज्यादा बनना शुरू हो जाता है। गौर हो कि इंसुलिन की कमी से ही डाइबिटीज को बढ़ावा मिलता है।

मंडूकासन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इससे पाचन तंत्र सुधरता है और पेट के अन्य रोगों से छुटकारा मिलता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय से जुड़ीं बीमारियों में यह आसन काफी लाभकारी है। पेट और जांघ के हिस्से की चर्बी (Fat) हटाने के लिए भी मंडूकासन का अभ्यास किया जाता है।

ऐसे करें यह आसन

मंडूकासन के लिए सबसे पहले समतल जगह पर वज्रासन (दोनों पैर को मोड़कर इन्हें नितंबों के नीचे कर बैठना) में बैठ जाएं। इस दौरान अपनी पीठ, कमर और गर्दन को सीधा रखें। अब दोनों हाथों की मुट्ठी बंद करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके अंगूठे मुट्ठी के अंदर अंगुलियों से दबे होने चाहिए। फिर मुट्ठी को जांघ और नाभि के पास ले जाएं। इस समय मुट्ठी सीधी और अंगुलियां पेट की तरफ होनी चाहिए। अब दोनों मुट्ठी को नाभि के दाएं और बाएं लगाकर सांस बाहर की तरफ छोड़ें। इस दौरान आपकी नजर सामने होनी चाहिए। थोड़ी देर के बाद फिर वज्रासन की स्थिति में आ जाएं। इस पूरी प्रक्रिया को रोज कम से कम 3-4 बार करें।

मंडूकासन ही नाम क्यों

इस आसन को करते समय व्यक्ति मेंढक की भांति प्रतीत होता है। इसलिए इसका नाम मंडूक और आसन को मिलाकर मंडूकासन रखा गया। इसे करना बहुत ही आसान है। इस आसन को कहीं भी, कभी भी किया जा सकता है। वैसे इसे सुबह करना ज्यादा उपयुक्त माना जाता है।

ये बरतें सावधानी

गर्भवती महिलाओं को इस आसन को नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को पेट का कोई ऑपेरशन या सर्जरी हुई हो, उन्हें भी इस आसन को किसी भी सूरत में करने से बचना चाहिए। नाभि, कमर या घुटनों में ज्यादा तकलीफ रहती हो तो डॉक्टर से सलाह के बाद ही मंडूकासन करें।

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