किसी भी उम्र में हो सकता है एक्जिमा

एक्जिमा (Eczema) के बारे में धारणा है कि यह बच्चों में ज्यादा फैलता है, बड़ों में कम। लेकिन विशेषज्ञ इसे खारिज करते हैं। उनके अनुसार यह बीमारी किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। बच्चों और बड़ों में इस बीमारी के असर को देखकर फर्क जरूर महसूस किया जा सकता है, पर है यह दोनों के लिए दुखदायी। यह रोग समय और परिस्थिति के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है। एक्जिमा में त्वचा पर जगह-जगह लाल और सूखे दाग-धब्बे हो जाते हैं। रोग बढ़ने पर त्वचा फटने लगती है और मवाद भी आने लगता है। यह हाथ, कोहनी, गाल, गर्दन पैर या शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसका कोई स्थायी निदान नहीं है। इसे नियमित तौर नियंत्रित जरूर किया जा सकता है।

बचाव के 3 प्रमाणिक सूत्र

अमेरिका की राष्ट्रीय एक्जिमा एसोसिएशन ने एक्जिमा से बचाव के 3 सूत्र सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर पीड़ित काफी राहत महसूस कर सकते हैं :

1. दिक्कत वाली जगह को साफ करें

एक्जिमा के मरीजों को दिक्कत वाली जगह को हमेशा साफ रखना चाहिए। इसके लिए दिन में एक बार गुनगुने पानी से 5-10 मिनट तक जरूर नहाएं। सोने से पहले नहाना बेहतर होता है। इससे त्वचा में नमी देर तक बरकरार रहती है। नहाते समय किसी ऐसे साबुन का इस्तेमाल न करें जिसमें कोई खुशबू या खुजली को बढ़ावा देने वाला रंग मिलाया गया हो। दिक्कत वाली जगह को किसी भी स्थिति में तेजी से न रगड़ें।

2. नियमित और निर्धारित उपचार अपनाएं

नहाने के बाद तौलिए को त्वचा पर रगड़ने के बजाय हल्के से रखें। इसके बाद डॉक्टर द्वारा निर्धारित मलहम या लोशन की पतली परत दिक्कत वाली जगह पर लगाएं। इसके मरीजों को हमेशा डॉक्टर के निर्देशों का अक्षरशः पालन करना चाहिए। इस रोग में कई डॉक्टर लोशन की जगह मलहम का प्रयोग ज्यादा लाभकारी मानते हैं।

3. त्वचा की नमी को बरकरार रखें

एक्जिमा के मरीजों के लिए त्वचा की नमी को बरकरार रखना अनिवार्य शर्त है। ऐसे लोगों को मॉइस्चराइजर का हमेशा इस्तेमाल करना चाहिए। इसे सिर्फ दिक्कत वाली जगह पर लगाने के बजाय पूरे शरीर में लगाना बेहतर होता है। इसके मरीजों को मॉइस्चराइजर पंप के जरिए त्वचा पर ऊपर से नीचे की तरफ लगाना चाहिए। नहाने से पहले और त्वचा सूखी महसूस होने पर इसे जरूर लगाएं।

सूरजमुखी का तेल फायदेमंद

ओमेगा-3 एस से भरपूर खाद्य पदार्थ, अलसी और सूरजमुखी के तेल का इस्तेमाल एक्जिमा में लाभकारी साबित होता है। जिंक और विटामिन E किसी न किसी रूप में लेना इसमें बेहतर साबित होता है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के अनुसार गांजे की पत्ती भी इसके इलाज में कारगर साबित होती है।

इनसे दूर रहें

एक्जिमा के मरीजों को मछली, अंडे और दूध से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मक्खन और बादाम आदि का सेवन भी इसमें नुकसानदायक होता है। इसके अलावा कुछ भी ऐसा खाने से बचें, जिससे पेट में जलन की समस्या पैदा हो। इससे त्वचा में भी खुश्की आती है और दिक्कत बढ़ जाती है।

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