आग से जलने पर फौरन ये करें

आग से जलने का दर्द (Burn Injury) बेहद असहनीय होता है। ऐसे में तत्काल और सही उपचार मिले तो काफी राहत मिलती है। यह उपचार इस पर भी निर्भर करता है कि बर्न इंजुरी किस स्तर की है। मुख्यतः इसके चार स्तर होते हैं -पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा। पहले और कुछ हद तक दूसरे स्तर का उपचार तो अपने से संभव है, पर बाकी में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत पड़ती है। इलेक्ट्रिक शॉक या करंट लगने पर कुछ जरूरी एहतियात जरूर बरतना चाहिए।

बचाव के उपाय

ठंडा पानी और पट्टी

आग से जलने के फौरन बाद करीब 20 मिनट तक संबंधित जगह पर ठंडा पानी डालना चाहिए। साफ कपड़े की पट्टी को ठंडे पानी में डुबोकर जले हुए स्थान पर रखने से भी आराम मिलता है। इसे 5 से 10 मिनट के अंतराल पर बदलते रहना चाहिए। ध्यान रखें इन दोनों ही प्राथमिक उपचार में पानी एकदम ठंडा नहीं होना चाहिए, नहीं तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।

शहद और हल्दी

शहद में एंटी बायोटिक गुण पाए जाते हैं, इसलिए यह घाव को भरने में मददगार साबित होता है। जलन वाले स्थान को पानी से धोने के बाद शहद लगाना चाहिए। कपड़े पर शहद लगाकर इस पट्टी को रखने से जलन से राहत मिलती है। हल्दी का पानी लगाने से भी दर्द से आराम मिलता है।

एलोवेरा जेल, तुलसी पत्ता और तिल

एलोवेरा जलन को कम करने के साथ ही बैक्टीरिया को बढ़ने से भी रोकता है, इसलिए जले हुए स्थान पर एलोवेरा जेल (Gel) लगाएं। ऐसा जेल न लगाएं जिसमें एलोवेरा के अलावा दूसरे मिश्रण ज्यादा हों। एलोवेरा के पौधे की पत्तियां तोड़कर शुद्ध जेल लगाने से भी लाभ मिलता है। हल्का सा जलने पर तुलसी के पत्ते का रस और तिल को पीसकर संबंधित स्थान पर लगा सकते हैं।

मीठा सोडा और चायपत्ती

हल्के जले हुए स्थान पर मीठा सोडा लगाने से भी थोड़ी राहत मिलती है। इस जगह पर चायपत्ती पानी में भिगोकर लगाने से आराम मिलता है। टी-बैग का उपयोग करना बेहतर रहता है। ज्यादा जलने की स्थिति में इन तरीकों को नहीं अपनाना चाहिए।

ये न करें

  • जलने वाली जगह पर नारियल तेल, जैतून का तेल या सरसों का तेल तथा बटर इत्यादि नहीं लगाना चाहिए। ये जलन को और बढ़ाने का काम करते हैं।
  • यह गलत धारणा है कि टूथपेस्ट लगाने से जलन से आराम मिलता है। डॉक्टर कहते हैं कि यह जलन के साथ-साथ इंफेक्शन बढ़ाने का काम करता है, इसलिए इसे लगाने से बचें।
  • बहुत से लोग जलने वाले स्थान पर बर्फ रगड़ने की सलाह देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इससे जलन घटने के बजाय बढ़ती ही है। बर्फ कोल्ड बर्न का भी कारण बन सकती है।
  • जलने वाले स्थान को खुले में न रखें। इससे इंफेक्शन का खतरा रहता है। इसको धूप से भी बचाना चाहिए, क्योंकि इससे जलन और भी बढ़ सकती है।
  • जली हुई त्वचा पर अंडे फोड़कर नहीं लगाना चाहिए। इससे राहत तो कुछ नहीं मिलती, ये इंफेक्शन और एलर्जी का कारण भी बन सकते हैं।
  • करंट या शॉक की स्थिति में खुद से इलाज से बचना चाहिए, क्योंकि स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

पहले से एहतियात

  • घर में आग से होने वाले हादसे को रोकने के लिए स्मोक डिटेक्टर और फायर इस्टिंगग्विशर लगवाना चाहिए।
  • बच्चों को कभी न कभी आग से बचाव पर होने वाली कार्यशाला में भाग लेने के लिए भेजना चाहिए।
  • शहर की ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को घर में फोल्ड होने वाली सीढ़ी रखनी चाहिए। आग संबंधी हादसों के समय इसकी जरूरत समझ में आती है।
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