चांदनी चौक, दिल्ली की परांठे वाली गली : आखिर क्यों है यह खास

दिल्ली में लजीज खाने के यूं तो कई ठिकाने हैं, पर चांदनी चौक की परांठे वाली गली कई मामलों में बहुत खास है। यहां परांठों की कई वेरायटी मिलती है और वो भी एकदम शुद्ध शाकाहारी। इस गली का सदियों पुराना इतिहास है। यहां कभी परांठे खाने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी और विजय लक्ष्मी पंडित के साथ आए थे। यहां आने पर आपको पुरानी दिल्ली के असली दर्शन होते हैं।

6 पीढ़ियों वाली दुकान का परांठा

यहां छह पीढ़ियों से परांठे की दुकान चली आ रही है। 1872 में पंडित गया प्रसाद परांठेवाला से यहां दुकान की शुरुआत हुई थी। अब यहां परांठे की 15 से भी अधिक दुकानें हो चुकी हैं। ये सारी दुकानें एक ही खानदान की हैं। हालांकि इस गली का नाम 1911 में बदलकर छोटा दरीबा किया जा चुका है, पर आज भी इसे परांठे वाली गली के नाम से ही जाना जाता है। चांदनी चौक को मुगल सम्राट शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम ने डिजाइन किया था, इसलिए यहां पुरानी दिल्ली की हर रंगत दिखती है। कपड़ों और गहनों की खरीदारी के लिए भी चांदनी चौक खास जगह है।

परांठों की वेरायटी, रेट और दुकान खुलने का समय

यहां आपको आज भी पुराने अंदाज में परांठे खाने को मिलेंगे। इन परांठों में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। अलग और खास टेस्ट के लिए परांठों में काजू, बादाम और मेवे भी डाले जाते हैं। यहां आपको पनीर, आलू, गोभी, पुदीना, करेला, पापड़ , मेवा और खोया परांठे समेत परांठों की ढेर सारी वेरायटी मिल जाती है। यहां एक परांठे की कीमत करीब 120 रुपये है। परांठे की ये दुकानें सुबह 9:00 बजे से रात 11:00 बजे तक खुली रहती हैं।

यहां कैसे पहुंचें

परांठे वाली गली पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन यलो लाइन स्थित चांदनी चौक है। यहां से आप पैदल भी परांठे वाली गली तक पहुंच सकते हैं या ई-रिक्शा से जाया जा सकता है। लालकिला मेट्रो स्टेशन उतरकर भी ई-रिक्शा के जरिए यहां जा सकते हैं। चांदनी चौक काफी भीड़-भाड़ वाला इलाका है, इसलिए यहां जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना ही ठीक रहता है। वीकेंड में भीड़ और ज्यादा होती है, इसलिए इन दिनों में यहां जाने से बचना चाहिए।

आसपास में और खास क्या

परांठे वाली गली में जब परांठे खाने जाएं तो आसपास के कुछ लजीज आइटम भी जरूर टेस्ट करके आएं। जंग बहादुर कचौड़ी वाले की खस्ता और दाल कचौड़ी, केदारनाथ प्रेमचंद हलवाई का गुलाब जामुन और लस्सी, कंवरजी के शाही टोस्ट और जलेबीवाला की राबड़ी के साथ जलेबी एक बार जरूर ट्राई करें। आप इनका स्वाद भूल नहीं पाएंगे।

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