ब्राह्मी (Brahmi) में हैं स्मरण क्षमता बढ़ाने के खास गुण

ब्राह्मी (Brahmi) एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जो कई बीमारियों में रामवाण की तरह काम करती है। इसका वानस्पतिक नाम बाकोपा मोनिएरी (Bacopa Monnierie) है। इसके खास औषधीय गुणों के कारण प्राचीन काल से ही इसका चिकित्सा में प्रयोग किया जाता रहा है। प्राचीन ग्रन्थों चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में भी इसका उल्लेख पाया जाता है। ब्राह्मी में स्मरण क्षमता बढ़ाने के खास गुण पाए जाते हैं। इसे ‘ब्रेन बूस्टर’ भी कहा जाता है। इसका प्रयोग कई तरह से किया जा सकता है। यह रस, कैप्सूल, पाउडर या चूर्ण के रूप में मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाता है। इसे ऑनलाइन भी मंगाया जा सकता है। इसके पौधे को घर के गमले या गार्डन में लगाया जा सकता है। ब्राह्मी रसीला पौधा है जो जमीन पर फैलता है। इसे पानी की जरूरत पड़ती है। इसके फूल सफेद, गुलाबी और नीले रंग के होते हैं। यह पौधा उष्ट कटिबंधीय इलाके में ज्यादा होता है।

कंसन्ट्रेशन में वृद्धि

ब्राह्मी का किसी भी रूप में प्रयोग दिमाग के लिए बहुत लाभकारी साबित होता है। 60 लोगों पर 12 हफ्ते तक चले एक अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने रोज 300 से 600 मिलीग्राम ब्राह्मी का सेवन किया, उनका ध्यान, कंसन्ट्रेशन, किसी भी सूचना को प्रकिया में लाने की योग्यता और स्मरण क्षमता काफी बढ़ी हुई थी। इसके प्रयोग से किसी भी सूचना को लंबे समय तक धारण करने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।

पाचन में सुधार

ब्राह्मी के सेवन से पाचन में काफी सुधार होता है। इससे पेट में जलन, कब्ज और दर्द आदि की समस्या दूर होती है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स इसमें काफी मददगार होते हैं। ये शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करते हैं। ब्राह्मी का तेल पेट पर लगाने से भी पेट दर्द से राहत मिलती है।

मिर्गी के इलाज में कारगर

मिर्गी के दौरे को कम करने या बार-बार उसकी आवृत्ति रोकने में ब्राह्मी काफी कारगर साबित होता है। इसके लिए ब्राह्मी का किसी भी तरह का सेवन फायदेमंद होता है। इसे काढ़े या घी और तेल के साथ प्रयोग किया जा सकता है। इसकी पत्तियों को भी नियमित चबाने से काफी लाभ होता है। ब्राह्मी डिमेंशिया और अल्जाइमर को रोकने में भी काफी सहायक है।

तनाव और चिंता कम करे

तनाव और चिंता दूर करने में ब्राह्मी बहुत काम आता है।
इसके सेवन से कोर्टिसोल का स्तर कम होता है। कोर्टिसोल एक ऐसा हार्मोन है जो सीधे तनाव के स्तर से जुड़ा होता है। इसके अलावा ब्राह्मी व्यक्ति के मूड को बदलने का भी काम करता है, इससे चिंता से छुटकारा मिलता है। इसके इस्तेमाल से नींद न आने की दिक्कत भी दूर होती है।

कैंसर और अर्थराइटिस से राहत

ब्राह्मी में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं। यह कैंसर कोशिकाओं को रोकने के साथ ही उनके खात्मे का काम करता है। जानवरों और टेस्टट्यूब अध्ययन में यह साबित भी हो चुका है। इसके अलावा यह अर्थराइटिस या गठिया में भी काफी कारगर है। ब्राह्मी की पत्तियों के मलने से शरीर का सूजन कम होता है।

ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

ब्राह्मी के इस्तेमाल से शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड रिलीज होता है, जो हमारे रक्त संचार को सुधारने का काम करता है। इससे ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण बना रहता है और कई बीमारियों की आशंका अपने आप खत्म हो जाती है। डायबिटीज के रोगियों को भी ब्राह्मी के सेवन से लाभ पहुंचता है। दर्द में भी ब्राह्मी बहुत कारगर है। सिर दर्द, पीठ दर्द और मांसपेशियों के दर्द में ब्राह्मी का तेल लगाने से काफी राहत मिलती है।

ब्राह्मी के अन्य लाभ

बालों के विकास के लिए ब्राह्मी का तेल लाभकारी होता है। इससे बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है। यह सांस रोगियों के लिए रामवाण औषधि है। इसकी पत्तियों को चाय में डालकर पीने से सांस और कफ की दिक्कत दूर होती है। इसके अलावा ब्राह्मी के प्रयोग से नसों को ताकत मिलती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है।

ये बरतें सावधानी

  • ब्राह्मी के पाउडर को दूध या घी में मिलाकर लिया जा सकता है। बहुत से लोग चाय में इसका चूर्ण मिलाकर पीते हैं। किसी भी रूप में इसका प्रयोग दिन में 2 से 3 बार किया जा सकता है। इसकी डोज की कम या ज्यादा मात्रा संबंधित व्यक्ति पर भी निर्भर करती है, इसलिए रस या पाउडर की शीशी और डिब्बे पर लिखे निर्देश का पालन करना बेहतर होता है।
  • गर्भवती महिलाओं को ब्राह्मी का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। इससे उनको नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर रोगियों को भी डॉक्टर की सलाह के बिना ब्राह्मी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा लंबे समय तक ब्राह्मी का प्रयोग नुकसानदायक भी हो सकता है। नियमित तौर पर 70-75 दिन तक इसका प्रयोग पर्याप्त माना जाता है। उपयोग करने वालों को इसका फायदा खुद महसूस होने लगता है।
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