इल्तुतमिश का मकबरा (Tomb of Iltutmish, Delhi) : जानें इतिहास, कब-कैसे पहुंचें, क्या है टिकट दर

गुलाम वंश की नींव रखने वाले कुतुबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी और दामाद इल्तुतमिश का मकबरा (Tomb of Iltutmish) दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित है। परिसर के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में स्थित इस मकबरे को इल्तुतमिश ने खुद 1235 में बनवाया था। इसे भारत में किसी भी मुस्लिम शासक का पहला अब तक विद्यमान मकबरा माना जाता है। इस मकबरे को 1993 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था। कुतुब मीनार परिसर में पर्यटकों के लिए और भी कई आकर्षण हैं। यहां घूमने जाना बहुत ही आसान है।

मकबरे की छत नहीं

कभी दिल्ली के सुल्तान रहे इल्तुतमिश के इस मकबरे की आज भी कोई छत नहीं है। कहा जाता है कि इस मकबरे को एक गुंबद से ढका गया था, पर यह गुंबद गिर गया। बाद में फीरोज शाह तुगलक (1351-88) ने दूसरा गुंबद बनवाया, पर यह भी टिक नहीं पाया। इल्तुतमिश की किस्मत में शायद यही नसीब था। कुतुब मीनार परिसर के उत्तर पश्चिम में स्थित इल्तुतमिश का मकबरा बाहर से एकदम सादा है। हालांकि, इसके गेट पर और अंदर शानदार नक्काशी की गई है। इन नक्काशियों में चक्र, घण्टी, जंजीर, कमल आदि देखने को मिलते हैं। इसके बारे में कहा गया कि यह इस्लामी उद्देश्यों के लिए हिंदू कला के इस्तेमाल किए जाने का शानदार उदाहरण है।

इल्तुतमिश के अन्य कार्य

इल्तुतमिश ने लाहौर की जगह दिल्ली को अपनी राजधानी बनाई थी। उसने कलाकारों, कवियों और सूफी संतों को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध किया। उसने दिल्ली में कई तालाब भी खुदवाए। 1235 में एक युद्ध के दौरान इल्तुतमिश बीमार पड़ गया। एक साल तक बीमारी से जूझने के बाद इल्तुतमिश ने अपनी बेटी रजिया को दिल्ली का सुल्तान घोषित कर दिया।

खुलने के दिन और समय

इल्तुतमिश का मकबरा देखने के लिए सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच सप्ताह के किसी भी दिन जा सकते हैं।

कब जाएं घूमने

इल्तुतमिश के मकबरे के टूर के लिए बहुत सोचने की जरूरत नहीं है, आप सालभर में कभी भी यहां जा सकते हैं। वैसे ज्यादा तापमान की वजह से मई-जून में यहां जाने से बचना चाहिए। शाम को और वीकेंड में भीड़ ज्यादा रहती है, इसलिए सुबह के समय और वीकेंड अलावा अन्य दिनों में यहां जाना बेहतर होता है।

प्रवेश के लिए टिकट दर

इल्तुतमिश के मकबरा के लिए अलग से कोई टिकट नहीं है। चूंकि यह कुतुब मीनार परिसर में स्थित है, इसलिए इसे देखने के लिए कुतुब मीनार का प्रवेश शुल्क चुकाना होगा। यह शुल्क इस प्रकार है :

प्रति भारतीय : 40 रुपये

प्रति विदेशी नागरिक : 600 रुपये

(15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क)

इल्तुतमिश का मकबरा (Tomb of Iltutmish) कैसे पहुंचें

बस (Bus)

कुतुब मीनार परिसर स्थित इल्तुतमिश का मकबरा दक्षिणी दिल्ली के महरौली में स्थित है। महरौली बस डिपो से कुतुब मीनार परिसर की दूरी सिर्फ 1 किलोमीटर है, इसलिए यहां बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

मेट्रो (Metro)

यलो लाइन स्थित कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन से उतरकर भी कुतुब मीनार परिसर तक जाया जा सकता है। यहां से यह 1.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन से कुतुब मीनार परिसर के लिए ऑटो भी मिलते हैं। इनका किराया 50 रुपये है।

कुतुब मीनार परिसर के अन्य आकर्षण

कुतुब मीनार (Qutub Minar)

कुतुब मीनार (Qutub Minar) का निर्माण दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1199 में शुरू करवाया था। प्रसिद्ध सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर इसका नाम कुतुब मीनार रखा गया। ऐबक ने कुतुब मीनार के आधार और पहले तल को बनवाया। ऐबक के उत्तराधिकारी और उसके दामाद इल्तुतमिश ने 1220 में इसके ऊपर तीन मंजिल और बनवाई। 1368 में फीरोज शाह तुगलक ने इसकी पांचवीं और अंतिम मंजिल बनवाई। इसकी प्रत्येक मंजिल में एक बालकनी है।

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (Quwwat-Ul-Islam Mosque)

कुतुब मीनार परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (Quwwat-Ul-Islam Mosque) भी स्थित है, जिसे दिल्ली की पहली मस्जिद कहा जाता है। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार हिन्दू और जैन मंदिरों को तोड़कर उनके ऊपर इस मस्जिद का निर्माण कराया गया। तब मंदिरों के बहुत से पिलरों का पुनर्निर्माण कर इस मस्जिद का हिस्सा बना लिया गया। इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में शुरू कराया था, इसके बनने में चार वर्ष का समय लगा। बाद में 1230 में इल्तुतमिश और 1351 में फीरोज शाह तुगलक ने भी इसमें कुछ हिस्सों को जोड़ा। इस मस्जिद में हिंदू और इस्लामिक कला का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

अलाई दरवाजा (Alai Darwaza)

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिणी प्रवेश द्वार को अलाई दरवाजा (Alai Darwaza) कहा जाता है। इसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 में करवाया था। अलाई दरवाजे के निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। यह तुर्की शिल्प कौशल का नायाब नमूना है। इसमें गुंबद भी है, जिसका निर्माण अष्टकोणीय आधार पर किया गया है। अलाई दरवाजे की ऊंचाई 17 मीटर और इसके गेट की चौड़ाई करीब 10 मीटर है। दरवाजे पर खूबसूरत नक्काशी की गई है।

अलाई मीनार, दिल्ली (Alai Minar, Delhi)

कुतुब मीनार परिसर (Qutub Minar Complex) स्थित अलाई मीनार (Alai Minar) का निर्माण महत्वाकांक्षी सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का कभी बड़ा सपना था। वह इसे कुतुब मीनार से भी दोगुना ऊंचा बनवाना चाहता था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह पूरा नहीं हो सका।
दक्कन के अभियानों में जीत के जश्न को यादगार बनाने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 ईस्वी में अलाई मीनार का निर्माण शुरू कराया था। इससे पहले उसने कुव्वत-उल-इस्लाम (Quwwat-Ul-Islam) मस्जिद के बाड़ों का आकार चार गुना बढ़वा दिया था। खिलजी चाहता था कि अलाई मीनार का निर्माण ऐसे किया जाए जो कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद की ऊंचाई से मेल खाए और वह कुतुबमीनार से भी श्रेष्ठ दिखे। अभी अलाई मीनार के पहले तल तक का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ था कि 1316 में अलाउद्दीन खिलजी की मौत हो गई। अलाउद्दीन खिलजी के उत्तराधिकारी ने इस मीनार के निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। उसके हारने के कारण दिल्ली सल्तनत फिर से तुगलक वंश के अधीन हो गई। इस तरह से दुर्भाग्यवश अलाई मीनार अर्धनिर्मित ही रह गई। यह आज भी वैसे ही है। अलाई मीनार 24.38 मीटर यानी 80 फीट ऊंची है। इसकी परिधि 77.72 मीटर (255 फीट) है।

आसपास के प्रमुख पर्यटक स्थल

कुतुब मीनार घूमने के साथ-साथ नजदीक के और भी कई स्थानों पर जाया जा सकता है। कुतुब मीनार से महरौली का पुरातात्विक पार्क पैदल भी जाया जा सकता है। यहां से इसकी दूरी करीब 500 मीटर ही है। इस ट्रिप के दौरान साकेत, दिल्ली स्थित सिटी वॉक मॉल, सरोजिनी नगर स्थित प्रसिद्ध मार्केट और दिल्ली हॉट जाया जा सकता है। लोटस मंदिर, इस्कॉन मंदिर, तुगलकाबाद किला, असोला भाटी वन्य जीव अभ्यारण्य भी कुतुब मीनार परिसर से कुछ किलोमीटर के दायरे में ही स्थित हैं। कुतुब मीनार परिसर से गुरुग्राम स्थित ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स’ की दूरी करीब 16 किलोमीटर है। पिकनिक या मनोरंजन के लिए आप यहां भी जा सकते हैं।

कुतुब मीनार परिसर का फोन नंबर

011-26643856

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