गुलाब की खेती दिलाएगी एक साल में 35 लाख रुपये

गुलाब (Rose) जीवन में सिर्फ सुगंध ही नहीं घोलता, पैसों से भी मालामाल बना सकता है। इसकी खेती (Farming) से साल में 30 से 35 लाख रुपये आराम से कमाए जा सकते हैं। आईआईटी और आईआईएम की नौकरी छोड़ बहुत से युवा आज इस आधुनिक खेती को अपना रहे हैं। उन्होंने अपने यहां बहुत से लोगों को रोजगार भी दे रखा है। कृषि और बाजार की समझ बढ़ाकर इस खेती से होने वाली आमदनी में और इजाफा किया जा सकता है। गुलाब की खेती के लिए सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जाती है। युवा अपनी थोड़ी सी रकम और सरकारी मदद के माध्यम से इस खेती की शुरुआत कर सकते हैं।

खेती के लिए इनकी जरूरत

गुलाब की खेती के लिए सबसे पहले जमीन की जरूरत होती है। जितनी अधिक जमीन होगी, उतनी ही खेती को बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद एक पॉलीहाउस की आवश्यकता होती है, जिसके अंदर गुलाब की खेती की जाती है। यह तापमान को नियंत्रित रखने के साथ ही बाहरी पानी से गुलाब को बचाने का काम करता है। गुलाब की अधिक पैदावार और बेहतर क्वालिटी के लिए यह जरूरी होता है। इसके अलावा पानी की मोटर और 4-6 मजदूरों की जरूरत पड़ती है। खेती से पहले इस बारे में एक बार प्रशिक्षण लेना बेहतर होता है। यह प्रशिक्षण कृषि विभाग द्वारा भी दिया जाता है।

मिट्टी, जलवायु और रोपण का समय

गुलाब की खेती किसी भी तरह की मिट्टी में की जा सकती है, पर इसके लिए दोमट, मटियार दोमट या बलुआर दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है। इस खेती के लिए पूरे दिन धूप और हवा बहुत जरूरी है। इस खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु उत्तम मानी जाती है। इसके लिए दिन के समय का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात को 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। इसकी खेती उत्तर और दक्षिण भारत में सर्दी के दिनों में की जाती है। सितंबर से नवंबर और फरवरी और अप्रैल के बीच का समय इसकी खेती के लिए सही माना जाता है। क्यारी बनाकर इसकी खेती की जाती है। अच्छी पैदावार के लिए कलम से तैयार पौधों के बजाए जड़ से उगाए पौधे ही लगाए जाते हैं।

गुलाब की उन्नत किस्में

गुलाब की उन्नत किस्मों को लगाने से दोहरा फायदा होता है। एक तो इससे गुलाब की पैदावार ज्यादा होती है, दूसरे इसकी क्वालिटी बेहतर होती है। उन्नत किस्मों में टॉप सेक्रेट राजमहल (रेड रोज), नारंगा (ऑरेंज), अवालेन्स (व्हाइट रोज), गोल्ड स्टिक (यलो) आदि शामिल हैं। बाजार में लाल गुलाब की मांग ज्यादा रहती है, इसलिए लाल गुलाब की खेती घाटे का सौदा साबित नहीं होती।

क्या बरतें सावधानी

पॉलीहाउस के नीचे क्यारियों की चौड़ाई 100 सेंटीमीटर और दो क्यारियों के बीच आधा मीटर स्थान होना चाहिए। इससे गुलाब के फैलने और फूलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। इन क्यारियों में पानी बहुत देर तक भरा नहीं रहना चाहिए। पौधों की सिंचाई फुहार विधि से करनी चाहिए। पौधों से शाखाएं निकलने के बाद उन्हें ऊपर से नीचे की तरफ मोड़ देना चाहिए, ताकि और नई शाखाएं निकल सकें और फूलों की पैदावार बढ़े। पौधे को फूल देने में करीब चार महीने का समय लगता है, इसलिए फूल डिलीवरी को लेकर बाजार से कोई करार करते समय पहले से इतना समय लेकर चलें।

यहां से मिलती है मदद

गुलाब की खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि मंत्रालय की ओर से मदद दी जाती है। प्रदेश सरकारों की ओर से भी इसके लिए 40, 50 से 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। अलग-अलग प्रदेशों में यह सब्सिडी अलग-अलग है। इस खेती के लिए विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंक भी लोन मुहैया करवाते हैं।

बाजार और कमाई का गणित

एक एकड़ जमीन में करीब 30,000 गुलाब के पौधे लगाए जा सकते हैं। इतनी जमीन पर गुलाब की खेती का कुल खर्च 20 से 25 लाख रुपये तक आता है। एक साल के अंदर एक पौधा 20 से 25 फूल दे जाता है। त्योहार के दिनों में गुलाब की अकेले एक स्टिक 6 से 8 रुपये में बिक जाती है। क्रिसमस, न्यू ईयर, वेलेंटाइन डे या शादी समारोहों के दौरान एक स्टिक की कीमत 10-20 रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा गुलदस्ता बनाने, गुलाब जल, गुलकंद और इत्र के लिए भी गुलाब की बहुत मांग है। इसके होल सेल सप्लायर या इससे जुड़ीं कंपनियों से भी संपर्क कर गुलाब की खपत बढ़ाई जा सकती है। बाजार में एक बार साख बनने के बाद कमाई बढ़ती ही जाती है।

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