मलेरिया बुखार भी ठीक कर देता है नीम का पत्ता

नीम (Neem) के अंदर 140 तरह के यौगिक पाए जाते हैं। ये सभी चिकित्सा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। गेडुनिन (Gedunin) नीम में पाया जाने वाला एक ऐसा ही तत्व है, जो मलेरिया बुखार (Malaria fever) रोकने में कारगर है। नीम के पत्ते से लेकर इसके फल, टहनी और छाल तक सभी उपयोगी हैं। अपने बैक्टीरिया और वायरस रोधी गुणों के कारण नीम का वैज्ञानिक तौर पर आज दुनियाभर में प्रयोग हो रहा है। विभिन्न बीमारियों के लिए इसका पाउडर, तेल या टैबलेट उपलब्ध है। आंत या पित्त की बीमारी दूर करने के लिए इसकी पत्तियों की चाय एक प्रमाणिक इलाज की विधि बन चुकी है।

वायरस को बढ़ने न दे

नीम के रस के सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे भूख उत्पन्न होती है और शरीर मजबूत बनता है। इस कारण मलेरिया के परजीवियों से लड़ने में मदद मिलती है। चिकिसकों के अनुसार नीम की पत्तियों को किसी भी रूप में लेने से रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीकरण की स्थिति बढ़ जाती है। इससे मलेरिया के वायरस का विकास रुक जाता है। डेंगू बुखार में भी नीम के पत्ते को उपयोगी माना जाता है।

डाइबिटीज पर नियंत्रण

रोज आधा गिलास नीम का रस पीने से डाइबिटीज में राहत मिलती है। अगर यह रोज संभव न हो तो इसे हफ्ते में 3 दिन लिया जा सकता है। नीम का रस शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है। नीम का तैयार रस बाजार में आसानी से उपलब्ध है। हालांकि घर में इसका रस निकालकर प्रयुक्त करना ज्यादा बेहतर होता है।

पेट के कीड़े खत्म करे

नीम के पत्तियों का जूस पीने वालों के पेट के कीड़े अपने आप खत्म हो जाते हैं। इससे आंत की बीमारी से राहत मिलती है। इसके सेवन करने वालों को फोड़ा-फुंसी से छुटकारा मिल जाता है। इसके अलावा इससे पेट की जलन खत्म होती है और पाचन तंत्र में काफी सुधार आता है। गौर हो कि पाचन सही न होने से कई बीमारियों का जन्म होता है।

दांत और त्वचा की देखभाल

नीम का दातुन करने वालों के दांत बेदाग और चमकीले रहते हैं। नीम के एंटीबैक्टीरियल गुण के कारण इसके इस्तेमाल करने वालों के मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। इसका रस त्वचा को दाग-धब्बों से बचाता है और इसे मुलायम रखता है। नीम फंगस रोधी भी है। इस कारण इसके इस्तेमाल से बालों में डैंड्रफ आदि से छुटकारा मिलता है। नीम के पत्तों को गुनगुने पानी में गर्म कर नहाने से कुछ दिनों में जूं की समस्या अपने आप दूर हो जाती है।

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