ॐ को समझ लिया तो आपका जीवन सफल, क्यों है यह इतना खास?

ॐ कार जगत का आधार है। सभी देवी-देवताओं के ईष्ट भगवान शिव का यह मूल मंत्र है। यह बीज शब्द है, जिससे समस्त शब्दों की उत्पत्ति हुई है और आखिर में इसी में सबको समाहित होना है। ॐ शब्द की महिमा का गुणगान हमारे शास्त्रों में बखूबी किया गया है। इनके अनुसार यह ऐसा परम संगीत है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि के स्वर समाए हुए हैं। कहा गया है कि इसके जाप या उच्चारण मात्र से शरीर को असीम ऊर्जा मिलती है तथा विकारों या बीमारियों का समूल नाश होता है। वेदों का मूल भी ॐ ही है। इनके अनुसार जिसने ॐ कार की महिमा समझ ली, उसका जीवन सफल हो जाता है। ॐ शब्द का प्रभाव अन्य धर्मों पर भी दिखता है। तमाम रिसर्च में दुनियाभर में इस दिव्य नाद की महत्ता साबित हो चुकी है।

ॐ कार का जाप क्यों करें

  • ॐ अनहद ध्वनि है। यह हमेशा बजती रहती है। यह पूरे ब्रह्मांड से हमेशा निकलती रहती है। हमारी श्वांस से भी यह ध्वनि हमेशा निकलती रहती है। यह शरीर के भीतर भी है और बाहर भी। यह निरंतर जारी है। वर्तमान, भूत, भविष्य में ओंकार ही है। इसके अलावा यह तीनों काल से बाहर भी है। इसके उच्चारण मात्र से शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसको सुनने से आत्मा और मन को असीम शांति मिलती है।
  • ॐ शब्द कुल तीन ध्वनियों- अ, उ, म से बना है। अ का अर्थ है आविर्भाव या उत्पन्न होना, उ का मतलब है उठना और म का अर्थ है मौन या ब्रह्मलीन हो जाना। इन ध्वनियों का जिक्र उपनिषद में भी आता है। यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा भू लोक, भुवः लोक और स्वर्ग का भी प्रतीक है। कहा गया है कि समस्त तपस्वियों का तप इस ओंकार शब्द में ही समाहित है। दरअसल, ॐ अक्षर उस ओम् का विस्तार है, जिसे ब्रह्मांड कहा जाता है।
  • ‘तस्य वाचक: प्रणव’ अर्थात उस ईश्वर का वाचक प्रणव ‘ॐ’ है। प्रणव अथवा ॐ और ब्रह्म में किसी तरह का कोई भेद नहीं है। ॐ ही ब्रह्म है। इस अक्षर का विनाश नहीं हो सकता। श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि जो ॐ अक्षर का जाप करते हुए शरीर त्याग करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
  • किसी भी मंत्र से पहले जब ॐ शब्द जुड़ जाता है तो उसे पूरी तरह से शुद्ध और असरकारक माना जाता है। यही कारण है कि हर मंत्र से पहले ॐ जुड़ा मिलता है, जैसे- ॐ विष्णवे नम:, ॐ नम: शिवाय, ॐ रामाय नमः। गायत्री मंत्र से पहले भी ॐ आता है। शास्त्रों के अनुसार एक बार ॐ का जाप हजार बार किसी मंत्र के जाप से महत्वपूर्ण है।
  • अन्य धर्मों में भी ॐ के महत्व का वर्णन मिलता है। जैन, बौद्ध दर्शन के अलावा सिख धर्म में भी ॐ का महत्व प्रतिपादित किया गया है। सिख धर्म में कहा गया है – इक ओमकार सतनाम करता पुरुख…। अर्थात इस सम्पूर्ण जगत का स्वामी एक है। इस्लाम और ईसाई धर्म में भी ॐ अक्षर की ध्वनि महसूस की जाती है। कहा जाता है कि अमीन भी ॐ का विकृत रूप है।
  • ॐ के उच्चारण से शरीर के अलग-अलग भागों में कंपन होता है। इससे रक्त प्रवाह बेहतर बना रहता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है। ॐ का जाप थायराइड ग्रंथि पर सकारात्मक असर डालता है। इससे दिल और अनिद्रा से जुड़ी दिक्कत भी दूर होती है।
  • रूस के वैज्ञानिक भी एक समय आधुनिक मशीन के साथ प्रयोग में ॐ के महत्व को देख चौंक उठे थे। इस दौरान पाया गया कि बाहर ॐ शब्द बोलने और भीतर कोई और शब्द विचार करने पर भी मशीन में अंदर-बाहर ॐ ही छपता था। बाकी किसी अन्य शब्द के साथ ऐसा नहीं पाया गया। मसलन अगर बाहर आप ‘ख’ अक्षर बोल रहे हैं और अंदर ‘क’ सोच रहे हैं तो अंदर बाहर दोनों अलग-अलग अक्षर मशीन पर छप जा रहे थे। ओंकार के व्यापक महत्व के चलते अमेरिका के एक एफएम रेडियो पर अब भी सुबह की शुरुआत ॐ शब्द के उच्चारण से होती है।
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