VIDEO : धरती के इन 7 स्वर्ग को नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा

प्रकृति को सबसे करीब से कहीं देखना और महसूस करना हो तो नॉर्थ ईस्ट (North East) से अच्छी जगह कोई हो नहीं सकती। सेवन सिस्टर्स के रूप में प्रसिद्ध प्रदेशों के इन 7 स्थानों को घूमने के लिए सबसे अच्छी जगह (Best Travel Destinations) की संज्ञा दी गई है। ये धरती पर स्वर्ग से कम नहीं हैं। यहां बादल और धरती में फर्क मिट जाता है। पहाड़, नदियां, द्वीप, जलप्रपात और सुरम्य वन शांति और सुकून की असीम अनुभूति कराते हैं तो पशु-पक्षियों की जीवंतता और कलरव मन मोह लेता है। अगर आप बड़े शहरों के शोर-शराबे से ऊब गए हैं तो एक बार यहां की यात्रा जरूर करें, भले ही यह संक्षिप्त क्यों न हो।

1. माजुली द्वीप, असम (Majuli Island, Assam)

यह विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप (River Island) है, जो ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित है। यह 420 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। हालांकि दिन पर दिन कटाव की वजह से यह क्षेत्र थोड़ा कम हो गया है। इस द्वीप के आसपास हरियाली की भरमार है। यहां का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है। दुनियाभर के पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं। इस द्वीप की गुवाहाटी से दूरी 326 किलोमीटर है पर जोरहाट से यह नजदीक (20 किलोमीटर) है। जोरहाट से 12 किलोमीटर दूर स्थित निमती घाट से यहां के लिए दिनभर नाव (Ferry) मिलती है। यह कम खर्चीली भी है।

2. चेरापूंजी, मेघालय (Cherrapunjee, Meghalaya)

चेरापूंजी को अब सोहरा के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि यहां धरती खत्म हो जाती है यानि बादल पहाड़ों की चोटियों को ऐसे छूते हैं कि इन दोनों के बीच भेद खत्म हो जाता है। यह दुनिया के सर्वाधिक वर्षा वाले स्थानों में शुमार है। यहां ऐसा कोई दिन नहीं होता जब बारिश नहीं होती, इसलिए कहा जाता है कि यहां 12 महीने मानसून रहता है। चेरापूंजी समुद्र तल से 1,484 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज (पेड़ों की जड़ों से बना पुल) और नोहकलिकाई वाटरफॉल्स देखने लायक है। नोहकलिकाई जलप्रपात दुनिया के सबसे ऊंचे (1,100 फुट) झरनों में से एक है। यहां से बांग्लादेश नजदीक होने के कारण उसकी सीमा देखी जा सकती है। चेरापूंजी जाने के लिए आप गुवाहाटी या शिलांग उतरकर जा सकते हैं। गुवाहाटी से इसकी दूरी 146 किलोमीटर तो शिलांग से 52 किलोमीटर है।

3. पेलिंग, सिक्किम (Pelling, Sikkim)

पेलिंग को सिक्किम का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल माना जाता है। यह समुद्र तट से 2,150 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से कंचनजंघा की चोटियां बहुत ही मनोरम दिखती हैं। बर्फ से ढके पहाड़ रुहानियत का अहसास कराते हैं। यहां स्थित दो बौद्ध मठों-पेमयांगस्ते और संगचोएलिंग की भी अपनी ख्याति है। खेचुपेरी झील, सिंगशोरे ब्रिज और छांगे वाटरफॉल यहां यह घूमने लायक प्रमुख स्थान हैं। यहां अगस्त महीने के आसपास मनाया जाने वाला कंचनजंघा त्योहार बहुत प्रसिद्ध है। गंगटोक से पेलिंग ट्रेन से 3 घंटे का रास्ता है।

4. जीरो घाटी, अरुणाचल प्रदेश (Ziro Valley, Arunachal Pradesh)

जीरो घाटी में समय आकर ठहर जाता है। पहाड़ों के बीच यहां खूबसूरत नजारा उपस्थित होता है। घाटी के मुख्य कस्बे को हापोली नाम से जाना जाता है। घाटी में स्थित जीरो पुतु या आर्मी पुतु के आसपास की हरियाली देखते ही बनती है। यहां बांस और चीड़ के पेड़ जगह-जगह दिख जाते हैं। किले पाको से दिखने वाली हिमालय की बर्फीली चोटियां मन मोह लेती हैं। घूमने वालों को यहां सियांग नदी में रॉफ्टिंग का शानदार मौका मिलता है। मानसून प्रेमियों को जुलाई से सितंबर के बीच यहां जरूर आना चाहिए, क्योंकि इस दौरान जमकर बारिश होती है। यहां पहुंचने के लिए नजदीकी स्टेशन असम में पड़ने वाला जोरहाट है, जो जीरो घाटी से 98 किलोमीटर दूर है।

5. खोनोमा गांव, नगालैंड (Khonoma Village, Nagaland)

खोनोमा को देश के पहले ग्रीन विलेज का खिताब मिल चुका है। यह नगालैंड की राजधानी कोहिमा के 20 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यहां की कुल आबादी 3 हजार है। यह अपने जंगलों और विशेष तरह की खेती के लिए जाना जाता है। यहां पौधों की 250 तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 70 दवा बनाने में प्रयुक्त होती हैं। इस गांव में पौधों की 204 प्रजातियां विद्यमान हैं। खोनोमा और इसके आसपास के जंगलों में 196 तरह की चिड़िया और 25 तरह के सांप पाए जाते हैं। इसके अलावा 72 तरह के जंगली जानवर भी देखे जा सकते हैं। कोहिमा से होकर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

6. नाथू ला पास, सिक्किम (Nathu La Pass, Sikkim)

नाथू ला हिमालय में एक पहाड़ी दर्रा है, जो समुद्र तल से 4,310 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसका अर्थ है नाथू यानि सुनने वाले कान और ला मतलब पास। यह सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है। यहां सर्दी में -25 डिग्री तक तापमान पहुंच जाता है। गर्मी में यहां अधिकतम तापमान 10 डिग्री तक रहता है। भू-स्खलन के कारण मानसून में यहां जाना ठीक नहीं रहता है। नाथू ला जाने के लिए सिक्किम की राजधानी गंगटोक में अनुमति लेनी पड़ती है। बुधवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को ही यहां आप घूमने जा सकते हैं। नाथू ला पहुंचने के लिए गंगटोक से जाया जा सकता है। यहां से इसकी दूरी 54 किलोमीटर है। न्यू जलपाईगुड़ी यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन है।

7. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम (Kaziranga National Park, Assam)

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की तरफ से विश्व धरोहर के रूप में संरक्षित है। ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदानों में 430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह क्षेत्र जंगल, वेटलैंड और अपने घास के मैदानों के लिए जाना जाता है। यहां दुनियाभर में सबसे अधिक एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। यहां तेंदुआ, बाघ, हाथी, ऊदबिलाव, हिरण, बंदर समेत 40 तरह के प्रमुख जानवर देखे जा सकते हैं। हजारों प्रवासी पक्षी यहां हर साल आते हैं। हाथी की सवारी और जीप सफारी की सुविधा यहां उपलब्ध है। यहां पहुंचने के लिए जोरहाट एयरपोर्ट उतरा जा सकता है। यहां से काजीरंगा उद्यान जाने में 2 घन्टे लगते हैं। यहां नवंबर से अप्रैल के बीच जाना अच्छा रहता है। जून से सितंबर तक यह बंद रहता है। वैसे यह हर दिन खुलता है, पर भारी बारिश की स्थिति में सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया जाता है।

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