रेशम के कीड़ों से कमाएं एक लाख रुपये तक महीना

बेरोजगारों या किसानों के लिए रेशम कीट पालन (Sericulture) मोटी आमदनी का सर्वोत्तम जरिया है। इसमें एक बार 3 से 5 लाख रुपये लगाकर सालाना 12 लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। इसको साल-दर साल बढ़ाया भी जा सकता है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड और प्रदेश सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। बैंक भी इसके लिए आसानी से ऋण मुहैया कराते हैं। रेशम के कीटों के जरिये रेशम का उत्पादन किया जाता है। एक साल में 4 से 5 बार कीट पालन किया जा सकता है।

इसकी पड़ेगी जरूरत

रेशम कीट पालन के लिए एक अलग शेड या घर की आवश्यकता होती है। यह ऐसा होना चाहिए कि जब जरूरत तो इसमें हवा भी आ सके और एयर टाइट भी किया जा सके। कीट पालन के लिए कुछ एकड़ खेत में शहतूत (Mulberry) के पौधे भी लगाने पड़ेंगे। इन्हीं शहतूत की पत्तियों को रेशम के कीड़ों को खिलाया जाता है। सबसे पहले रेशम के अंडों को ट्रे में रखा जाता है। इस दौरान 25-30 डिग्री तापमान होना चाहिए। इन अंडों के प्रस्फुटन के बाद इन्हें जालीदार आवरण से ढक देते हैं। इसके बाद शहतूत की पत्तियों को काटकर डाल दिया जाता है। इसके अगले चरण में इन ट्रे को झाड़कर कीट पालन बेड में डालकर रखा जाता है। इस दौरान रेशम कीटों को मुलायम पत्तियां खिलाई जाती हैं। आखिरी चरण में कीट शहतूत की पत्तियां खाना बंद कर देते हैं और कोयो या कोकून का निर्माण करते हैं। इन्हीं कोकून से रेशम बनता है।

ऐसे होगी कमाई

100 कोकून से करीब 70 किलोग्राम रेशम निकलता है। एक किलोग्राम कोकून की कीमत 290 से 500 रुपये तक होती है। इस तरह एक वर्ष में लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है। जैसे-जैसे काम गति पकड़े, रेशम के अंडों को बढ़ाते जाएं, फायदा अपने आप बढ़ता जाएगा।

यहां से लें मदद

रेशम कीट पालन के बारे में किसी भी तरह की जानकारी के लिए कर्नाटक के मैसूर स्थित केंद्रीय रेशम कीट पालन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान से सम्पर्क किया जा सकता है। केंद्रीय रेशम बोर्ड भी कर्नाटक में ही है, उससे भी मदद ली जा सकती है। गौर हो कि रेशम के उत्पादन में कर्नाटक अग्रणी राज्य है।

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