बवासीर (Piles) में ये करेंगे तो तुरंत मिलेगा आराम

बवासीर या पाइल्स (Piles) बहुत ही तकलीफदेह बीमारी है। इसे हेमराइड्स (Hemorrhoids) भी कहते हैं। मलाशय के आसपास नसों की सूजन की वजह से यह रोग होता है। इसमें व्यक्ति का चलना-फिरना और सीधे बैठना तक मुश्किल हो जाता है। पहले और दूसरे स्टेज में इसका इलाज संभव है, आखिरी स्टेज में इसके इलाज से खास लाभ नहीं होता है। इसलिए इसके लक्षण दिखते ही उपचार के बारे में सोचना चाहिए। कई आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार भी इसमें कारगर साबित होते हैं, पर इनसे भी यह ठीक न हो तो डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए।

छुटकारे के आसान उपाय

गरम पानी : बवासीर के मरीजों को गरम पानी से नहाना चाहिए। इससे सूजन के साथ-साथ खुजली से भी राहत मिलती है।

आइस क्यूब : खुजली वाले भाग पर बर्फ के टुकड़े एक कपड़े में लपेटकर लगाना चाहिए। 5 मिनट तक भी ऐसा करने से आराम मिलता है। गरम पानी से भी सिंकाई की जा सकती है।

एलोवेरा : एलोवेरा जेल लगाने पर भी पाइल्स से राहत मिलती है। इस जेल को गुदा के निचले हिस्से में दिन में 3-4 बार लगाना चाहिए। नारियल और अरंडी का तेल लगाने से भी फायदा होता है।

केला : केला इस बीमारी में काफी फायदेमंद है। पके केले को बीच से चीरा लगाकर मध्य भाग में कपूर का चूर्ण छिड़क दें। 30 से 50 मिनट बाद इसका सेवन करें। सुबह खाली पेट ऐसा केला खाना बेहतर होता है।

इलायची : बड़ी इलायची को तवे पर भून लें। जब वह ठंडी हो जाए तो उसका चूर्ण बना लें। अब इसे सुबह-शाम नियमित लें, काफी आराम मिलेगा।

त्रिफला : रात को सोने से पहले 1-2 चम्मच त्रिफला का चूर्ण लेने से पेट में कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। बवासीर में भी इससे राहत मिलती है।

ये करें

  • बवासीर के मरीजों को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे कब्ज की दिक्कत दूर होती है।
  • ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन करनी चाहिए। फाइबरयुक्त आहार लेना बेहतर होता है।
  • साबुत और मोटे अनाज का सेवन काफी लाभकारी माना जाता है।

ये न करें

  • ऐसे मरीजों को तले-भुने खाने से बचना चाहिए। इससे पेट में कब्ज और जलन की समस्या बढ़ती है।
  • मैदा, बैंगन, मिर्च, तेल, मसूर की दाल और चीनी का इस्तेमाल बंद कर दें।
  • शौच के बाद साफ-सफाई को हल्के में न लें। सही तरीके से इसे करने पर काफी आराम मिलता है।

बवासीर के प्रकार

बवासीर रोग दो प्रकार का होता है : 1. खूनी बवासीर और 2. बादी बवासीर।

खूनी बवासीर

खूनी बवासीर में खून आता रहता है, हालांकि दर्द नहीं होता। गुदा या मलद्वार पर मस्सा बन जाता है। यह किसी मरीज में अंदर तो किसी में बाहर होता है। बहुत से मरीजों को इसे हाथ से दबाकर अंदर करना पड़ता है।

बादी बवासीर

बादी बवासीर में कब्ज और गैस की वजह से पेट खराब रहता है। मल कड़ा होने से इसमें खून भी आने लगता है। इसमें जलन के साथ ही दर्द और बेचैनी भी होती रहती है। मलद्वार में मस्से की वजह से घाव भी हो जाता है। इसे फिशर (Fissure) कहा जाता है। बवासीर का अगर समय रहते इलाज न कराया जाए यानि यह पुराना हो जाए तो भगन्दर का रूप ले लेता है। इसे फिस्टुला ( Fistula) भी कहते हैं। इसमें पखाने के रास्ते के बगल में छेद हो जाता है। यह घाव की तरह फूटता और बहता रहता है। इसमें रेक्टम कैंसर (Rectum Cancer) होने का खतरा बना रहता है।

ये हैं लक्षण

  • बवासीर के मरीजों को शौच के समय दर्द होता है।
  • मल के साथ खून आता है और खुजली होती है।
  • कई मरीजों के गुदा से मांस भी निकलने लगता है।
  • गुदे की नसों में सूजन और जलन होती है।
  • कब्ज के साथ ही बेचैनी महसूस होती रहती है।

बीमारी के कारण

  • कब्ज की वजह से मल कड़ा होता है। इससे रक्त वाहनियों पर जोर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति में बवासीर होने की आशंका बनी रहती है।
  • यह रोग आनुवंशिक भी होता है। खड़े होकर ज्यादा समय बिताने वाले लोगों को बवासीर होने की आशंका ज्यादा होती है।
  • ज्यादा भार उठाने या अधिक तनाव झेलने वालों को भी यह बीमारी हो सकती है।
  • डायरिया और गर्भधारण के दौरान भी इसके होने का खतरा होता है।
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